एक अदद तलाश
आज मैं अकेली हूँ,
इतनी कि, साँसे भी साथ आना नही चाहती , मन में छटपटाहट है ,
मुक्त होने की घुटन से, कुढ़न से,
आँखों के रास्ते निकलते आंसू
मेरे साथ छोड़े जा रहे है।
नमकीन गीले आँसू
 चाहकर भी मेरी प्यास न बुझा पाये।
तृषित प्यासे इस जीवन में एक अँधेरा है ,
जिसे एक अदद दीपक की तलाश है
है वो जो मेरे स्वाभिमान की रक्षा करे,
मेरे अरमानो के तस्वीर में रंग उकेरे,
हाँ ,मेरे उदासी मेरे एकाकीपन को परे धकेल ,मेरी अंतरंग सहेली बने।
हाँ, मेरे दर्द को महसूस करे ,मरहम बने ।
हाँ,मुझे उस दीपक की तलाश है,
जो मेरी बुझी मशाल कहाँ है? बता दे।

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