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Showing posts from May, 2017
एक अदद तलाश आज मैं अकेली हूँ, इतनी कि, साँसे भी साथ आना नही चाहती , मन में छटपटाहट है , मुक्त होने की घुटन से, कुढ़न से, आँखों के रास्ते निकलते आंसू मेरे साथ छोड़े जा रहे है। नमकीन गीले आँसू  चाहकर भी मेरी प्यास न बुझा पाये। तृषित प्यासे इस जीवन में एक अँधेरा है , जिसे एक अदद दीपक की तलाश है है वो जो मेरे स्वाभिमान की रक्षा करे, मेरे अरमानो के तस्वीर में रंग उकेरे, हाँ ,मेरे उदासी मेरे एकाकीपन को परे धकेल ,मेरी अंतरंग सहेली बने। हाँ, मेरे दर्द को महसूस करे ,मरहम बने । हाँ,मुझे उस दीपक की तलाश है, जो मेरी बुझी मशाल कहाँ है? बता दे।
दृढ़ संकल्प दूर बहुत दूर सितारों की बस्ती, आकांक्षा यही है कि आँचल में भर लू। उपवन भरा है ,गुलाब के फूलों से चाहता है मन यही तितली बन मकरंद ले लू। गहरा अति गहरा रत्नाकर डूबू और रत्न समेटू मैं। घने अति घने बीहड़ वन , वनराज को जंजीर में लपेटू मैं। जल दूर तक पसरा जल, द्वीप बन कर उभरु मैं। बादलों से भरा गगन , बिजली बन कर कौधू मैं। संकल्प हो ऐसा ,निराशा कहाँ है? प्रयास हो भरपूर, हताशा कहाँ है?